क्या कभी आपने सोचा है की क्या कोई अपनी सामान्य दिनचर्या को निभाते हुए पूरी तरह स्वस्थ रहकर भी दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रह सकता है? इसका मुख्य कारण यह है की अधिकतर दिल की बीमारियाँ काफी लंबे समय तक किसी स्पष्ट लक्षण के बिना प्रगति कर सकती हैं।उच्च रक्तचाप,उच्च कोलेस्ट्रॉल,डायबिटीज़ और धूम्रपान कुछ ऐसे जोखिम कारक है जो धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करते हैं।आमतौर पर लोग तब इसका एहसास करते है जब कुछ उनके जांच के दौरान सामने आता है। एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति की नॉर्मल हार्टबीट आराम की स्थिति में 60 से 100 बीट प्रति मिनट (BPM) होती है। नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में यह 60 से कम भी हो सकती है।
- 60 से 100 BPM: सामान्य रेंज
- 100 BPM से अधिक: आराम की स्थिति में लगातार रहने पर जांच की जरूरत हो सकती है।
- 60 BPM से कम: कुछ स्वस्थ लोगों और एथलीट्स में सामान्य हो सकती है।
ध्यान दें: हार्टबीट उम्र, शारीरिक गतिविधि, तनाव और अन्य स्थितियों के कारण बदल सकती है। इसलिए हार्ट अटैक के कारण समझना और समय रहते अपने दिल की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। इस लेख में जानिए दिल का दौरा पड़ने के कारण, प्रमुख Heart Attack Risk Factors, शुरुआती लक्षण और ऐसे व्यावहारिक कदम, जो हृदय की सेहत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
हार्ट अटैक क्यों आता है?
हार्ट अटैक एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन से भरपूर रक्त का प्रवाह अचानक कम या बंद हो जाता है। इसका सबसे आम कारण हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों से बने प्लाक का जमा होना है। जब प्लाक टूटता है, तो वहां खून का थक्का बन सकता है, जो रक्त के प्रवाह को रोक सकता है।
धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए हार्ट अटैक के कारणों को जानने के साथ समय पर जांच करवाना भी जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई। इनमें से लगभग 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण थीं। यह आंकड़ा हृदय रोगों के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है। दिल की सेहत के लिए आज ही अपनी Health Check-up करवाएं।
हार्ट अटैक के 4 छिपे कारण और जोखिम कारक

1. हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप
हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जब धमनियों में खून का दबाव लंबे समय तक अधिक रहता है, तो हृदय को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और धमनियों में प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों को इसका पता तब तक नहीं चलता, जब तक वे अपना ब्लड प्रेशर चेक नहीं करवाते।
बचाव के उपाय:
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं।
- भोजन में अतिरिक्त नमक का सेवन सीमित रखें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें और स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें और फॉलो अप करवाते रहें।
2. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन रक्त में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने पर यह धमनियों की दीवारों में जमा हो सकता है। इससे प्लाक बन सकता है और हृदय तक खून पहुंचने का रास्ता संकरा हो सकता है। बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए व्यक्ति सामान्य महसूस करने के बावजूद हृदय रोग के जोखिम में हो सकता है।
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने के लिए:
- फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें।
- ट्रांस फैट और अधिक तली हुई चीजों का सेवन सीमित करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं।
कुछ लोगों में खानपान और व्यायाम के साथ दवाओं की भी जरूरत हो सकती है।
3. डायबिटीज और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर
डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक अधिक रह सकता है। इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। यदि डायबिटीज के साथ हाई ब्लड प्रेशर या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी हो, तो जोखिम और बढ़ सकता है। डायबिटीज वाले कुछ लोगों में नसों की क्षति के कारण हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द जैसे सामान्य संकेत कम महसूस हो सकते हैं। इसीलिए नियमित जांच और लक्षणों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।
क्या करें?
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और HbA1c की जांच करवाएं।
- संतुलित भोजन करें और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं।
- निर्धारित दवाएं समय पर लें।
- अपनी मर्जी से दवाएं बंद न करें या उनकी खुराक न बदलें।
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना लंबे समय तक हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
4. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन हृदय रोग के ऐसे जोखिम कारक हैं, जिन्हें बदला जा सकता है। तंबाकू में मौजूद हानिकारक पदार्थ रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं और खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
सिगरेट के अलावा बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। दूसरों के धुएं के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
हृदय की सुरक्षा के लिए:
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन छोड़ने की कोशिश करें।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या तंबाकू छोड़ने में मदद करने वाली सेवाओं की सहायता लें।
- घर और कार्यस्थल को धुएं से मुक्त रखने की कोशिश करें।
तंबाकू छोड़ने से हृदय रोग का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। अपने दिल की सेहत के लिए आज ही नियमित जांच करवाएं और जोखिम कारकों को नजरअंदाज न करें।
हार्ट अटैक के अन्य जोखिम कारक
इन चार प्रमुख कारकों के अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी Heart Attack Risk Factors में शामिल हैं।
- मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और वजन बढ़ना हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जुड़ा हो सकता है।
- असंतुलित खानपान: अधिक नमक, अतिरिक्त चीनी और अस्वस्थ फैट वाला भोजन हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है।
- लगातार तनाव और नींद की कमी: लंबे समय तक तनाव और खराब नींद समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं और अस्वस्थ जीवनशैली की आदतों को बढ़ावा दे सकते हैं।
- उम्र और पारिवारिक इतिहास: उम्र बढ़ने और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग होने से जोखिम बढ़ सकता है। इन कारकों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन नियमित जांच और उचित देखभाल से अन्य जोखिम कारकों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
इन सभी बातों को समझना Causes of Heart Attack और Silent Risk Factors for Heart Attack के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करता है।
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में सीने में तेज दर्द हो सकता है, जबकि कुछ में शुरुआत हल्की बेचैनी या सांस फूलने से हो सकती है।
आम लक्षणों में शामिल हैं:
- सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन या दर्द।
- एक या दोनों हाथों, कंधों, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द या परेशानी।
- सांस लेने में कठिनाई।
- ठंडा पसीना आना।
- जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होना।
- चक्कर आना या अचानक असामान्य कमजोरी महसूस होना।
महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज वाले लोगों में लक्षण कभी-कभी कम स्पष्ट हो सकते हैं। कुछ हार्ट अटैक बिना स्पष्ट चेतावनी के भी होते हैं। जरूरी बात: यदि हार्ट अटैक का संदेह हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें?
हालांकि सभी जोखिम कारकों को नियंत्रित करना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें हृदय की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

- नियमित स्वास्थ्य जांच: ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच अपनी उम्र और जोखिम के अनुसार करवाएं।
- संतुलित भोजन: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और उपयुक्त प्रोटीन स्रोत भोजन में शामिल करें।
- शारीरिक गतिविधि: अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार पैदल चलना या अन्य व्यायाम करें। वयस्कों के लिए प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि सामान्य लक्ष्य है।
- तंबाकू से दूरी: धूम्रपान छोड़ना हृदय की सेहत के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
- नींद और तनाव का ध्यान: नियमित नींद का समय रखें और तनाव से निपटने के लिए आराम, योग या सांस से जुड़े अभ्यास अपनाएं।
- डॉक्टर की सलाह का पालन: हाई बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं अपनी मर्जी से बंद न करें।
यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास है या आपको डायबिटीज, हाई बीपी अथवा कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो डॉक्टर से अपने व्यक्तिगत जोखिम के बारे में चर्चा करें।
दिल की सेहत के लिए Jeena Sikho HiiMS में मार्गदर्शन
Jeena Sikho HiiMS में हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के लिए आयुर्वेदिक वेलनेस, संतुलित खानपान और जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध है। अस्पताल की वेबसाइट पर हृदय बस्ति (Hriday Basti), पंचकर्म, योग और ध्यान जैसी पद्धतियों का उल्लेख किया गया है। इनका उपयोग व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
हृदय बस्ति एक पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें छाती के एक सीमित हिस्से पर गुनगुना औषधीय तेल कुछ समय तक रखा जाता है। योग, ध्यान और आहार संबंधी मार्गदर्शन भी स्वस्थ दिनचर्या और तनाव प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इन पद्धतियों से हार्ट अटैक को रोकने या हृदय रोग ठीक करने का दावा नहीं किया जा सकता।
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लिए नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार जारी रखना जरूरी है। हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को पंचकर्म, गर्म पानी की थेरेपी या किसी अन्य प्रक्रिया से पहले अपने हृदय रोग विशेषज्ञ और योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। किसी भी निर्धारित दवा को अपने आप बंद न करें।
निष्कर्ष
हार्ट अटैक के पीछे कई ऐसे जोखिम कारक हो सकते हैं, जो लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रहते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और तंबाकू का सेवन इनमें प्रमुख हैं। इसके अलावा असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, उम्र और पारिवारिक इतिहास भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
हार्ट अटैक से बचाव की दिशा में सबसे जरूरी कदम हैं नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वस्थ जीवनशैली और मौजूदा बीमारियों का उचित प्रबंधन। केवल स्वस्थ महसूस करना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका दिल पूरी तरह सुरक्षित है। समय पर जांच करवाएं, जोखिम कारकों को समझें और हार्ट अटैक के संभावित लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें।
Jeena Sikho HiiMS में हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या और आयुर्वेद आधारित वेलनेस मार्गदर्शन पर ध्यान दिया जाता है। यदि आप अपने हृदय स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी चिंताओं पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहते हैं, तो HiiMS की VOPD (Virtual OPD) सेवा के माध्यम से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं। याद रखें, हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई देने पर ऑनलाइन परामर्श का इंतजार न करें, बल्कि तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. हार्ट अटैक के मुख्य कारण क्या हैं?
हार्ट अटैक का प्रमुख कारण हृदय की धमनियों में रक्त प्रवाह रुकना है। धमनियों में प्लाक जमा होना और उसके फटने पर खून का थक्का बनना इसके आम कारणों में शामिल हैं। हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और तंबाकू का सेवन जोखिम बढ़ाते हैं।
2. क्या हार्ट अटैक बिना लक्षणों के भी आ सकता है?
हां। कुछ हार्ट अटैक में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या स्पष्ट नहीं होते। इसीलिए नियमित जांच और जोखिम कारकों का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
3. क्या कम उम्र में भी हार्ट अटैक हो सकता है?
हां। कम उम्र में भी हार्ट अटैक हो सकता है, खासकर यदि व्यक्ति को डायबिटीज, हाई बीपी, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग होने का इतिहास हो।
4. हार्ट अटैक के खतरे का पता कैसे लगाया जा सकता है?
डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, पारिवारिक इतिहास, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसे कारकों का आकलन कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य जांच भी की जा सकती हैं।
5. क्या योग और खानपान में बदलाव से हार्ट अटैक का खतरा कम हो सकता है?
संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, उचित नींद और तनाव प्रबंधन हृदय की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन ये जरूरी दवाओं या मेडिकल जांच का विकल्प नहीं हैं।

