कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है
Google Add as a preferred
source on Google
Published on October 8, 2026

कोलेस्ट्रॉल अपने आप में बुरा नहीं है। शरीर को सेल्स और हार्मोन बनाने के लिए इसकी ज़रूरत होती है। दिक्कत तब शुरू होती है, जब यह ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाता है। अक्सर इसके लक्षण नहीं दिखते, इसलिए लोगों को रिपोर्ट से ही पता चलता है। तब मन में पहला सवाल यही आता है कि आखिर कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है?

ICMR-INDIAB स्टडी में भारत के 4 इलाकों के 2,042 लोगों के ब्लड फैट की जाँच हुई। इनमें से 79% लोगों में कोलेस्ट्रॉल या ब्लड फैट से जुड़ी कम से कम एक गड़बड़ी मिली। इस ब्लॉग में हम इसके कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक नज़रिया और बचाव के तरीके समझेंगे।

कोलेस्ट्रॉल क्या है और यह कैसे बढ़ता है?

कोलेस्ट्रॉल खून में मौजूद एक मोम जैसी चर्बी है। इसका ज़्यादातर हिस्सा हमारा लिवर बनाता है, बाकी खाने से आता है। यह मुख्य रूप से तीन तरह का होता है:

  • LDL: इसे “बैड” कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह खून की नसों की दीवारों पर जमने लगता है।
  • HDL: यह “गुड” कोलेस्ट्रॉल एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को वापस लिवर तक ले जाता है।
  • ट्राइग्लिसराइड्स: खून का एक और फैट, जो मीठा और मैदा ज़्यादा खाने से बढ़ता है।

लेकिन कोलेस्ट्रॉल कैसे बढ़ता है? जब LDL बढ़ता है या HDL घटता है, तो यह बैलेंस बिगड़ जाता है। ऐसे में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे नसों में जमने लगता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। तो अब समझते हैं कि आखिर कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है।

कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है? जानें मुख्य कारण

ज़्यादातर कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण हमारी रोज़ की आदतों से जुड़े होते हैं।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के मुख्य कारण

1. तला-भुना और पैकेट वाला खाना

वनस्पति घी, नमकीन, बिस्किट और बेकरी की चीज़ों में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट ज़्यादा होते हैं। ये दोनों सीधे LDL को बढ़ाते हैं।

2. ज़्यादा मीठा और मैदा

मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और मैदे वाली चीज़ें शरीर में जल्दी शुगर में बदलती हैं। जो शुगर खर्च नहीं होती, लिवर उसे ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है।

3. कसरत की कमी

दिनभर बैठे रहने से शरीर फैट को ठीक से खर्च नहीं कर पाता। इसका सबसे बड़ा असर HDL पर पड़ता है। ऊपर वाली स्टडी में भी करीब 72% लोगों का HDL कम मिला।

4. मोटापा और पेट की चर्बी

पेट के आसपास जमा चर्बी लिवर के काम करने का तरीका बदल देती है। नतीजतन, लिवर ज़्यादा LDL और ट्राइग्लिसराइड्स बनाने लगता है।

5. तनाव और कम नींद

लगातार तनाव में शरीर ऐसे हार्मोन बनाता है, जो ब्लड फैट पर असर डालते हैं। वहीं, कम नींद से मीठा और तला खाने का मन ज़्यादा करता है।

6. धूम्रपान और शराब

सिगरेट HDL को घटाती है और नसों की दीवारों को नुकसान पहुँचाती है। दूसरी तरफ, शराब ट्राइग्लिसराइड्स को तेज़ी से बढ़ाती है।

7. डायबिटीज़ और थायरॉइड

डायबिटीज़ में शरीर फैट को सही से संभाल नहीं पाता। थायरॉइड कम काम करे, तो भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

8. परिवार का इतिहास और बढ़ती उम्र

कुछ हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण जेनेटिक होते हैं, यानी परिवार से मिलते हैं। इसलिए पतले लोगों का कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र भी इसका खतरा बढ़ाती है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह चाहे जो भी हो, शरीर अक्सर इसका कोई साफ संकेत नहीं देता।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण: क्या शरीर कोई संकेत देता है?

ज़्यादातर मामलों में हाई कोलेस्ट्रॉल का कोई लक्षण नहीं होता। इसीलिए इसे “साइलेंट” समस्या कहते हैं। लक्षण तब दिखते हैं, जब नसों में रुकावट शुरू हो चुकी हो:

  • सीने में दर्द या भारीपन
  • थोड़ा चलने पर सांस फूलना
  • चलते समय पैरों में दर्द
  • आँखों के आसपास पीले धब्बे

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट ही इसे पक्के तौर पर पकड़ता है। डायबिटीज़, हाई BP या फैमिली हिस्ट्री हो, तो नियमित जाँच ज़रूर कराएं।

परिवार में किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी है? अपनी जाँच टालें नहीं, हमसे जुड़ें।

अभी विशेषज्ञ से सलाह लें

आधुनिक इलाज: क्या मदद करता है और कहाँ कमी रह जाती है?

कोलेस्ट्रॉल ज़्यादा होने पर डॉक्टर अक्सर स्टैटिन जैसी दवाइयाँ देते हैं, जो बहुत से लोगों के काम आती हैं।

लेकिन ये दवाइयाँ अक्सर सालों तक लेनी पड़ती हैं। कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द जैसे साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। दवाइयाँ नंबर कम करती हैं, पर खान-पान और तनाव पर अलग से ध्यान देना पड़ता है।

इसी वजह से कई लोग ऐसी देखभाल खोजते हैं, जो आदतों की जड़ पर काम करे।

आयुर्वेद के अनुसार कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है

आयुर्वेद में इसका जवाब पाचन से शुरू होता है। यह इसे मेद धातु, यानी शरीर की चर्बी, और कफ दोष से जोड़ता है। जब पाचन अग्नि, कमज़ोर होती है, तो खाना पूरी तरह नहीं पचता। इससे शरीर में आम, यानी अधपचा कचरा, बनने लगता है।

यह आम मेद के साथ मिलकर शरीर की नलियों में जमने लगता है। आयुर्वेद में इस हालत को मेदोरोग कहा गया है। इसलिए आयुर्वेदिक देखभाल जड़ पर काम करती है, जैसे पाचन सुधारना, हल्का खाना और ज़्यादा चलना-फिरना।

यह तरीका नियमित जाँच के साथ सबसे अच्छा काम करता है।

कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में Ayurveda कैसे मदद करता है

आयुर्वेद में कोलेस्ट्रॉल को सिर्फ एक ब्लड टेस्ट रिपोर्ट तक सीमित करके नहीं देखा जाता। खान-पान, पाचन, रोज़ की दिनचर्या, physical activity और stress: इन सभी चीज़ों पर ध्यान दिया जाता है। Jeena Sikho HiiMS जैसे Ayurveda centres में भी diet, lifestyle और Ayurvedic therapies को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से care का हिस्सा बनाया जाता है। 

1. pH-संतुलित आहार

आयुर्वेदिक खान-पान में ताज़े और हल्के भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। फल, सब्जियां और दूसरे plant-based foods को डाइट में शामिल किया जा सकता है, जबकि बहुत ज्यादा तला-भुना या processed food कम रखने की सलाह दी जाती है। डाइट को व्यक्ति की health condition और daily routine को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

Jeena Sikho HiiMS में pH-balanced diet को भी diet और lifestyle-based care का हिस्सा माना जाता है।

2. पंचकर्म

पंचकर्म आयुर्वेद की डिटॉक्स थेरेपी है। यह पाचन को सहारा देती है और शरीर से कचरा निकालने में मदद करती है। सही प्रक्रिया डॉक्टर जाँच के बाद तय करते हैं।

पंचकर्म के बारे में और जानें

3. हर्बल सहयोग

आयुर्वेद में अर्जुन, गुग्गुल और लहसुन का पारंपरिक इस्तेमाल ब्लड फैट के संतुलन के लिए होता है। 32 स्टडीज़ और 1,386 लोगों के एक एनालिसिस में गुग्गुल से टोटल कोलेस्ट्रॉल करीब 17 mg/dL कम हुआ। LDL में भी करीब 19 mg/dL की कमी आई। वहीं, लहसुन से LDL करीब 10 mg/dL घटा। रिसर्चर्स ने इन्हें “मध्यम रूप से असरदार” माना। 

4. मन और शरीर का उपचार

योग, प्राणायाम और ध्यान तनाव कम करते हैं। साथ ही, इनसे दिनचर्या नियमित बनती है।

कोलेस्ट्रॉल से बचाव के तरीके

ज़्यादातर कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय रसोई और रोज़ की दिनचर्या से ही शुरू होते हैं:

कोलेस्ट्रॉल से बचाव के तरीके

  • फाइबर ज़्यादा खाएं: ओट्स, जौ, दालें, हरी सब्ज़ियाँ और अलसी के बीज LDL घटाने में मदद करते हैं। फाइबर की वजह से आंतें खाने से कम कोलेस्ट्रॉल सोखती हैं।
  • तला-भुना, मैदा और चीनी कम करें: इन्हें एकदम छोड़ना मुश्किल लगे, तो धीरे-धीरे घटाएं।
  • रोज़ 30 मिनट तेज़ चलें: इससे HDL बढ़ता है।
  • वज़न कंट्रोल में रखें: थोड़ा वज़न कम होने से भी LDL और ट्राइग्लिसराइड्स में फर्क दिखता है।
  • सिगरेट छोड़ें और शराब सीमित करें: सिगरेट छोड़ने से HDL धीरे-धीरे सुधरने लगता है।
  • अच्छी नींद लें और तनाव कम रखें: 7–8 घंटे की नींद और रोज़ थोड़ा प्राणायाम शरीर को संतुलन में रखते हैं।
  • नियमित लिपिड टेस्ट कराएं: इससे बदलाव समय रहते पकड़ में आते हैं।

यही छोटी आदतें बताती हैं कि कोलेस्ट्रॉल सामान्य कैसे रखें।

निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल ज़्यादातर गलत खान-पान, कम चलने-फिरने, बढ़ते वज़न, तनाव और कुछ बीमारियों की वजह से बढ़ता है। इसके लक्षण अक्सर दिखते नहीं हैं, इसलिए जाँच ही इसे पकड़ने का सही तरीका है। आयुर्वेद इसे कमज़ोर पाचन और मेद धातु से जोड़ता है। कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है, यह समझ आने पर सही आदतों से इसे संतुलन में रखना आसान हो जाता है।

कोलेस्ट्रॉल को संतुलन में रखने की शुरुआत आज से करें। Jeena Sikho HiiMS में अपना कंसल्टेशन बुक करें, या घर बैठे VOPD (वीडियो कंसल्टेशन) के ज़रिए हमारे डॉक्टर से बात करें।

Video Consultation

FAQs

1. कोलेस्ट्रॉल को कैसे कम करें?

फाइबर वाला खाना बढ़ाएं, तला-भुना और मीठा कम करें, और रोज़ 30 मिनट तेज़ चलें। अगर डॉक्टर ने दवाई दी है, तो उसे भी समय पर लें।

2. कोलेस्ट्रॉल की जाँच कितनी बार करानी चाहिए?

आमतौर पर 20 साल की उम्र के बाद हर 4-5 साल में एक बार जाँच करानी चाहिए। डायबिटीज़, हाई BP या फैमिली हिस्ट्री हो, तो डॉक्टर जल्दी-जल्दी जाँच की सलाह देते हैं।

3. क्या पतले लोगों का कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है?

हाँ। कुछ लोगों में यह जेनेटिक कारणों से बढ़ता है, इसलिए वज़न कम होने पर भी जाँच ज़रूरी है।

4. आयुर्वेद कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में कैसे मदद करता है?

आयुर्वेद पाचन सुधारने, आम कम करने और सही खान-पान पर ध्यान देता है। गुग्गुल और लहसुन जैसी जड़ी-बूटियाँ डॉक्टर की सलाह से सहारा देती हैं।

5. Jeena Sikho HiiMS में कोलेस्ट्रॉल के लिए क्या देखभाल मिलती है?

यहाँ pH-संतुलित आहार, पंचकर्म, हर्बल सहयोग और योग-ध्यान को मिलाकर प्लान बनता है। आप अस्पताल आकर या VOPD (वीडियो कंसल्टेशन) से डॉक्टर से बात कर सकते हैं।

Dr. Niteshwari
Author:  Dr. Niteshwari
Dr. Niteshwari brings more than 5 years of clinical experience along with qualifications in BAMS, Ayurvedacharya and P.G.D.I.P. As a member of the Jeena Sikho HiiMS team, she contributes to patient care through a holistic Ayurvedic approach. Her broad area of practice allows her to work with patients dealing with different health concerns. She believes in understanding the person as a whole while providing guidance based on Ayurvedic principles.

Disclaimer: The information provided on this blog is for general educational and informational purposes only. It is not intended to replace professional medical advice, diagnosis, or treatment. Always consult a qualified healthcare professional before making any changes to your diet, lifestyle, or treatment plan. Individual results may vary.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *