अगर आपको या घर की किसी महिला को ब्रेस्ट में गाँठ महसूस हुई है, तो सबसे पहले यही सवाल आता है कि आगे क्या होगा। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैसे होता है, यह समझ लेने से डर काफी कम हो जाता है, क्योंकि इलाज कैंसर की स्टेज और प्रकार के हिसाब से तय होता है।
इस ब्लॉग में हम कारण, लक्षण, स्टेज, इलाज के विकल्प, खानपान और बचाव को आसान भाषा में बताएंगे। साथ ही Jeena Sikho HiiMS की कैंसर केयर के बारे में भी जानेंगे।
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ब्रेस्ट कैंसर के कारण: किन वजहों से खतरा बढ़ता है?
पहले कुछ आँकड़े देख लें। WHO की कैंसर एजेंसी IARC के 2022 के अनुमान के हवाले से Down To Earth ने बताया कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर के 1,92,020 नए मामले सामने आए। यह देश के सभी नए कैंसर मामलों का 13.6% है और महिलाओं में 26% से ज़्यादा है। Journal of Clinical Oncology: Global Oncology में छपे एक ओवरव्यू के मुताबिक एक अध्ययन में 50% से ज़्यादा मरीज़ एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुँचे थे। यानी देर से जाँच एक बड़ी समस्या है।
जोखिम बढ़ाने वाली बातें, जैसा Yale Medicine और WHO बताते हैं:
- 40 साल से ज़्यादा उम्र
- परिवार में ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर का इतिहास, या BRCA1/BRCA2 जीन में बदलाव
- पहली माहवारी जल्दी होना, मेनोपॉज़ देर से होना
- पहली प्रेग्नेंसी 30 के बाद होना, या कभी न होना
- शराब, कम शारीरिक गतिविधि और मेनोपॉज़ के बाद मोटापा
- लंबे समय तक कंबाइंड हार्मोन थेरेपी
एक ज़रूरी बात: WHO के अनुसार करीब 80% मामलों में उम्र और महिला होने के अलावा कोई ऐसा ब्रेस्ट कैंसर के कारण नहीं मिलता जिसे बदला जा सके। इसलिए किसी महिला को दोष देना सही नहीं है। जाँच या रिपोर्ट को लेकर उलझन है? Jeena Sikho HiiMS की टीम से बात करें।
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण और Breast Cancer Symptoms
ये ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते। आमतौर पर इन बातों पर ध्यान दें:

- ब्रेस्ट या बगल में गाँठ, अक्सर बिना दर्द के
- ब्रेस्ट के आकार या बनावट में बदलाव
- त्वचा पर गड्ढा, लाली या मोटापन
- निप्पल का अंदर धँसना, या उससे पानी या खून जैसा स्राव
- बगल या कॉलरबोन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन
ज़्यादातर गाँठें कैंसर नहीं होतीं, लेकिन किसी भी असामान्य गाँठ की जाँच करवानी चाहिए, भले ही दर्द न हो। कई बार शुरुआती स्टेज में कुछ महसूस ही नहीं होता और कैंसर सिर्फ़ मैमोग्राफी में दिखता है। इसलिए breast cancer symptoms न दिखने पर भी नियमित जाँच की सलाह दी जाती है, और ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण नज़र आते ही देर न करें।
हमारे पास आने वाली कई महिलाएँ बताती हैं कि गाँठ में दर्द नहीं था, इसलिए उन्होंने कुछ महीने इंतज़ार किया। दर्द का न होना सब ठीक होने की निशानी नहीं है।
ब्रेस्ट कैंसर की स्टेज कैसे तय होती है?
स्टेज बताती है कि कैंसर कितना फैला है। इसे तय करने के लिए ट्यूमर का साइज़ नापा जाता है, सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी होती है और ज़रूरत पर CT, PET या बोन स्कैन जैसी जाँचें की जाती हैं।
- स्टेज 0: कैंसर दूध की नली या लोब्यूल तक सीमित है (DCIS/LCIS)
- स्टेज I से III: ट्यूमर का साइज़ और लिम्फ नोड्स में फैलाव बढ़ने के साथ स्टेज बढ़ती है
- स्टेज IV: कैंसर लिवर, फेफड़े, दिमाग या हड्डियों जैसे दूसरे अंगों तक पहुँच चुका है
लिम्फ नोड्स में फैलाव के बिना छोटे ट्यूमर का इलाज ज़्यादा आसान रहता है। ब्रेस्ट कैंसर की स्टेज के साथ कैंसर का प्रकार भी देखा जाता है, जैसे हार्मोन रिसेप्टर पॉज़िटिव, HER2 पॉज़िटिव या ट्रिपल-नेगेटिव। इन्हीं के आधार पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज तय होता है।
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैसे होता है? Types of Breast Cancer Treatment
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैसे होता है, इसका जवाब हर मरीज़ में थोड़ा अलग होता है। US National Cancer Institute इलाज को दो हिस्सों में बाँटता है:
लोकल इलाज (जिस जगह कैंसर है वहाँ):
- सर्जरी: लम्पेक्टॉमी (सिर्फ़ गाँठ निकालना) या मास्टेक्टॉमी (पूरा ब्रेस्ट निकालना)। WHO के अनुसार पूरी लिम्फ नोड सर्जरी की जगह सेंटिनल नोड बायोप्सी को तरजीह दी जाती है, क्योंकि इसमें परेशानियाँ कम होती हैं।
- रेडिएशन थेरेपी: दोबारा कैंसर होने का खतरा घटाती है और कुछ मामलों में मास्टेक्टॉमी से बचा सकती है।
सिस्टमिक इलाज (पूरे शरीर के लिए):
- हार्मोन थेरेपी: हार्मोन पॉज़िटिव कैंसर में। WHO के अनुसार यह दोबारा कैंसर होने का खतरा लगभग आधा कर देती है।
- टार्गेटेड थेरेपी: जैसे HER2 पॉज़िटिव कैंसर में ट्रैस्टुज़ुमैब, जो कीमोथेरेपी के साथ दी जाती है
- इम्यूनोथेरेपी: NCI के अनुसार ट्रिपल-नेगेटिव कैंसर में इस्तेमाल हो सकती है
इन types of breast cancer treatment में से एक या कई को मिलाकर एक प्लान बनता है। WHO यह भी कहता है कि कोर्स पूरा करना बहुत ज़रूरी है, और सबसे अच्छा नतीजा तब मिलता है जब सर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट की टीम साथ मिलकर देखे।
ब्रेस्ट कैंसर में कीमोथेरेपी: कब और क्यों दी जाती है?
कीमोथेरेपी की दवाएँ कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं। इसे सर्जरी से पहले ट्यूमर छोटा करने के लिए दिया जा सकता है, या सर्जरी के बाद बची हुई कोशिकाओं को खत्म करने के लिए। WHO के अनुसार हार्मोन-नेगेटिव कैंसर में कीमोथेरेपी का इस्तेमाल होता है।
ब्रेस्ट कैंसर में कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स दवा और डोज़ पर निर्भर करते हैं, और हर मरीज़ में एक जैसे नहीं होते। American Cancer Society के अनुसार आम परेशानियाँ ये हैं:
- बाल झड़ना, नाखूनों में बदलाव और मुँह में छाले
- भूख कम लगना, मतली-उल्टी और दस्त
- थकान
- हाथ-पैर में सुन्नपन और झुनझुनी (नर्व की परेशानी, जिसे CIPN कहते हैं), जो कई बार पूरी तरह ठीक नहीं होती
- व्हाइट ब्लड सेल्स कम होने से संक्रमण का खतरा, और प्लेटलेट्स कम होने से आसानी से खून निकलना
- समय से पहले मेनोपॉज़ और गर्भधारण में दिक्कत
- एंथ्रासाइक्लिन दवाओं (जैसे डॉक्सोरूबिसिन) से दिल को नुकसान का जोखिम, खासकर HER2 थेरेपी के साथ
इन पर रिसर्च क्या कहती है:
- दिल पर असर: 27 अध्ययनों के एक सिस्टमैटिक रिव्यू में, जहाँ ज़्यादातर मरीज़ महिलाएँ थीं और सबसे आम कैंसर ब्रेस्ट कैंसर था, ज़्यादातर अध्ययनों में कीमोथेरेपी के बाद दिल की समस्याएँ दर्ज हुईं। एक अस्पताल के रिकॉर्ड पर आधारित ASCO 2011 एब्स्ट्रैक्ट में एंथ्रासाइक्लिन लेने वाले 793 मरीज़ों में करीब 4% में दिल की कमज़ोरी मिली, और ज़्यादातर में कोई लक्षण नहीं था। इसीलिए लेखकों ने बिना लक्षण वाले मरीज़ों में भी दिल की जाँच (LVEF) की सलाह दी है।
- इम्यूनिटी: NCI के अनुसार कीमोथेरेपी से इम्यूनिटी कमज़ोर हो सकती है, इसलिए खाने की साफ़-सफ़ाई ज़रूरी है। NCI यह भी बताता है कि मतली-उल्टी जैसे लक्षणों को दवाओं से अक्सर रोका या कम किया जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज और संभावित साइड इफेक्ट्स को समझने के लिए
ब्रेस्ट कैंसर में क्या खाना चाहिए?
इलाज के समय शरीर को आम दिनों से ज़्यादा प्रोटीन और कैलोरी चाहिए होती है। यहाँ सिर्फ़ शुद्ध शाकाहारी विकल्प बताए गए हैं। NCI की गाइडलाइन के आधार पर ये बातें मदद कर सकती हैं:
- शाकाहारी प्रोटीन शामिल करें, जैसे दाल, चना, राजमा, दही, पनीर, दूध और मेवे-बीज
- दिन में 5-6 छोटे भोजन लें, और सबसे बड़ा भोजन तब लें जब भूख सबसे ज़्यादा हो
- पानी या तरल चीज़ें ज़्यादातर भोजन के बीच में पिएं
- कच्ची सब्ज़ी और फल अच्छी तरह धोएं, और कच्चा या अधपका खाना सावधानी से खाएं
- मुँह में छाले हों तो नरम और ठंडा खाना लें, स्वाद बदल जाए तो नींबू या मसालों का इस्तेमाल करें
- शराब से दूर रहें
ब्रेस्ट कैंसर में क्या खाना चाहिए, इसका कोई एक चार्ट सबके लिए नहीं होता। यह इस पर निर्भर करता है कि ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कौन-सा चल रहा है, आपका वज़न कितना है और ब्लड रिपोर्ट कैसी है, इसलिए डाइटीशियन से प्लान बनवाना बेहतर है। कोई भी सप्लीमेंट या जड़ी-बूटी शुरू करने से पहले भी अपनी टीम को बताएं, क्योंकि कुछ दवाओं के असर में दखल दे सकती हैं। इलाज के साथ खानपान और रूटीन पर सलाह चाहिए? Jeena Sikho HiiMS के डॉक्टर से जुड़ें।
Jeena Sikho HiiMS में कैंसर केयर: डिटॉक्स जूस और गोल्डन थेरेपी
Jeena Sikho HiiMS (Hospital & Institute of Integrated Medical Sciences) में आयुर्वेद, नेचुरोपैथी और आधुनिक मेडिकल साइंस को साथ लेकर देखभाल की जाती है।
कैंसर डिटॉक्स जूस: क्या है?
HiiMS के अनुसार यह जूस पत्तेदार हरी चीज़ों, हल्दी, अदरक, आँवला और चुकंदर से बनता है, और सुबह खाली पेट लिया जाता है। पूरे मिश्रण को कैंसर मरीज़ों पर परखने वाला कोई प्रकाशित अध्ययन हमें नहीं मिला। इसलिए हर सामग्री को अलग से देखना ठीक रहेगा:
- अदरक: ऊपर बताए ट्रायल में कीमोथेरेपी के दौरान मतली और उल्टी में कमी दिखी थी। यह जूस में अदरक का सबसे ठोस आधार है, पर ट्रायल बहुत छोटा था।
- हल्दी: रेडिएशन वाले ट्रायल में 6 ग्राम करक्यूमिन रोज़ दिया गया था, जो जूस में मिलने वाली मात्रा से काफी ज़्यादा है।
- आँवला, चुकंदर और हरी पत्तियाँ: कैंसर मरीज़ों पर इनके अलग से अच्छे अध्ययन हमें नहीं मिले हैं। ये सामान्य रूप से पौष्टिक सब्ज़ी-फल हैं और शाकाहारी थाली का हिस्सा बन सकते हैं।
गोल्डन थेरेपी: क्या है?
HiiMS के अनुसार गोल्डन थेरेपी जड़ी-बूटियों का एक लेप है, जिसमें बरगद, करेला, अमरूद, नीम, पीपल, दूब और कच्ची हल्दी होती है। इसे पैरों के तलवों पर लगाया जाता है, और HiiMS का कहना है कि यह त्वचा के रास्ते असर करता है। इसकी सामग्री पर जो रिसर्च मिली:
- करेला: Cancer Research जर्नल में 2010 में छपे एक अध्ययन में करेले के एक्सट्रैक्ट ने लैब में इंसानी ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं की बढ़त घटाई और कोशिकाओं की मृत्यु बढ़ाई। लेकिन यह सिर्फ़ लैब डिश में हुआ था, इंसानों पर नहीं। बाहर के एक विशेषज्ञ ने कहा था कि लोग इसे अपनी डाइट में जोड़ें, उससे पहले जानवरों पर नतीजे जाँचने ज़रूरी हैं।
- हल्दी: इसकी रिसर्च ऊपर बताई जा चुकी है, और वह खाने वाले करक्यूमिन पर थी, लेप पर नहीं।
- बरगद, अमरूद, नीम, पीपल और दूब: इनके ब्रेस्ट कैंसर के मरीज़ों में इस्तेमाल पर हमें कोई अध्ययन नहीं मिला।
इन्हें कैसे देखें?
सादा, पौधों पर आधारित खाना और योग-ध्यान इलाज के दौरान सहारा दे सकते हैं, और इन्हें सपोर्ट के तौर पर अपनाया जा सकता है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैसे होता है, यह doctor आपकी रिपोर्ट के आधार पर तय करते हैं।
जूस या लेप शुरू करने से पहले अपनी कैंसर टीम को बताएं, और जो ब्रेस्ट कैंसर के मरीज की डाइट आप अपनाना चाहते हैं, उसे डाइटीशियन से मिलाकर देख लें।
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय
पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, क्योंकि ज़्यादातर कारण हमारे हाथ में नहीं होते। फिर भी ये आदतें जोखिम घटाने में मदद करती हैं:
- शराब सीमित रखें या बिल्कुल न लें
- रोज़ चलें या कोई कसरत करें
- मेनोपॉज़ के बाद वज़न संतुलित रखें
- लंबे समय की हार्मोन थेरेपी शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें
- अपने ब्रेस्ट की बनावट पहचानें और बदलाव दिखे तो जाँच कराएं
- मैमोग्राफी कब शुरू करनी है, यह डॉक्टर से पूछें। WHO के अनुसार स्क्रीनिंग आम तौर पर 50 से 69 साल की उम्र में की जाती है। परिवार में कैंसर का इतिहास हो तो पहले शुरू करने की ज़रूरत पड़ सकती है।
निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर में सबसे बड़ा फर्क जाँच के समय से पड़ता है। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैसे होता है, यह स्टेज, प्रकार और आपकी सेहत पर निर्भर करता है, और सही समय पर शुरू हुआ इलाज ज़्यादा विकल्प देता है। ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय अपनाएं, लक्षण दिखें तो टालें नहीं, और जो भी सपोर्टिव केयर लें, उसे अपनी कैंसर टीम की जानकारी में रखें।
घर बैठे सलाह चाहिए? Jeena Sikho HiiMS के साथ VOPD (वीडियो कंसल्टेशन) बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. ब्रेस्ट कैंसर में सबसे पहले कौन-सा इलाज होता है?
यह स्टेज पर निर्भर है। अक्सर सर्जरी पहले होती है, और कुछ मामलों में ट्यूमर छोटा करने के लिए पहले कीमोथेरेपी दी जाती है।
2. क्या हर गाँठ कैंसर होती है?
नहीं, ज़्यादातर गाँठें कैंसर नहीं होतीं। फिर भी हर नई गाँठ की जाँच करवाएं।
3. ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखें तो पहले क्या करें?
ब्रेस्ट सर्जन या ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलें। वे जाँच बताएंगे, जैसे मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड या बायोप्सी।
4. ब्रेस्ट कैंसर की स्टेज कैसे पता चलती है?
ट्यूमर का साइज़, लिम्फ नोड्स की जाँच और स्कैन से। इसके साथ कैंसर का प्रकार भी देखा जाता है।
5. क्या हल्दी या डिटॉक्स जूस से कैंसर का इलाज हो सकता है?
इन्हें सिर्फ़ डॉक्टर की जानकारी में सपोर्ट के तौर पर लें।
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