लो-बीपी-के-लिए-आयुर्वेदिक-थेरेपी
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Published on October 21, 2026

जब भी बीपी की बात होती है, तो ज्यादातर लोग हाई बीपी के बारे में सोचते हैं। पर बीपी का कम होना भी उतना ही ध्यान देने लायक है। जैसे की उठते-बैठते चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छाना या बिना वजह कमजोरी लगना, इन सबको लोग आमतौर पर थकान समझकर छोड़ देते हैं। कई बार इनके पीछे Low BP ही कारण होता है।

तो आखिर लो ब्लड प्रेशर क्या है? आसान शब्दों में, जब नसों में खून का दबाव जरूरत से कम हो जाए, तो उसे ‘लो बीपी’ कहते हैं। तब दिमाग और बाकी अंगों तक खून धीरे-धीरे पहुंचता है और शरीर ढीला पड़ने लगता है। वजह कभी छोटी होती है, जैसे पानी की कमी, लेकिन कभी दवा या कोई बीमारी भी वजह बन जाती है।

हर बार कम रीडिंग का मतलब बीमारी नहीं होता। पर बार-बार दिक्कत हो, तो उसे समझना भी उतना ही ज़रूरी है। इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि सही बीपी कितना होता है, कौन-से लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं, कारण क्या हैं और रोज की कौन-सी आदतें अपनाना काम आता है।

सामान्य ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?

ब्लड प्रेशर मापते समय बीपी मशीन पर दो नंबर आते हैं, जैसे 120/80। ऊपर वाला नंबर उस वक्त का दबाव है, जब दिल धड़ककर खून को आगे भेजता है। नीचे वाला नंबर तब का दबाव है, जब दो धड़कनों के बीच दिल थोड़ा आराम करता है।

एक स्वस्थ वयस्क में लगभग 120/80 mmHg को आम तौर पर अच्छा पैमाना माना जाता है। पर सामान्य ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए, इसका एक ही जवाब सब पर लागू नहीं होता। उम्र, शरीर और दिन के समय के हिसाब से रीडिंग बदलती रहती है।

NHS के अनुसार 90/60 से नीचे की रीडिंग को लो बीपी माना जाता है। लेकिन एक बार कम रीडिंग आने का मतलब बीमारी नहीं है। कुछ लोगों का बीपी पैदाइश से ही कम रहता है और उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। ध्यान देने वाली बात यह है कि नंबर के साथ आपको कैसा महसूस हो रहा है।

लो ब्लड प्रेशर क्या है?

हम सबके शरीर में खून नसों में दबाव के साथ बहता है, इसी को ब्लड प्रेशर कहते हैं। अब सीधे बात करते हैं कि लो ब्लड प्रेशर क्या है। जब यह दबाव सामान्य से नीचे चला जाए, तो उसे लो ब्लड प्रेशर या ‘हाइपोटेंशन’ कहते हैं।

दबाव ज्यादा गिर जाए, तो दिमाग तक जरूरत जितना खून नहीं पहुंचता। तब चक्कर आते हैं, कमजोरी लगती है और कभी-कभी धुंधला दिखता है।

हर किसी पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग कम रीडिंग में भी ठीक रहते हैं। कुछ को जरा-सी ब्लड प्रेशर की गिरावट पर ही चक्कर आने लगते हैं।

आयुर्वेद में लो बीपी को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में शरीर को वात, पित्त और कफ, इन तीन दोषों के संतुलन से देखा जाता है। साथ में आपकी प्रकृति, खाना और दिनचर्या भी देखी जाती है।

पर हर लो बीपी की वजह दोषों का बिगड़ना ही हो, यह जरूरी नहीं। खून की कमी या दवा का असर भी वजह हो सकता है। इसलिए आयुर्वेद को जांच की जगह नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह के साथ चलने वाला तरीका समझें।

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण कौन-कौन से हैं?

असल में हमारा शरीर पहले से संकेत देने लगता है, बस हमें उसी को ही समझना होता है। लो ब्लड प्रेशर के लक्षण ये हो सकते हैं:

  • अचानक चक्कर आना या सिर हल्का लगना
  • बैठे या लेटे हुए उठते ही आंखों के सामने अंधेरा छा जाना
  • धुंधला दिखना
  • ज्यादा काम किए बिना भी थकान और कमजोरी
  • जी मिचलाना
  • किसी काम में ध्यान न लगना
  • ज्यादा गिरावट में बेहोशी या दिमाग का उलझ जाना

पर ध्यान रखें, ऐसे लक्षण खून की कमी, कम शुगर या कान की दिक्कतों में भी आते हैं। इसलिए हर इस तरह के लक्षण को लो बीपी न मान लें।

अगर आपको बार-बार चक्कर, कमजोरी या धुंधला दिखने जैसी परेशानी हो रही है, तो सही कारण जानने के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लें। 

विशेषज्ञ से परामर्श लें

कब इन्हें हल्के में न लें?

अगर लो बीपी के लक्षण बार-बार आएं, रोज के काम में अड़चन डालें या बेहोशी तक पहुंच जाएं, तो जांच करा लें। NHS भी बार-बार चक्कर और बेहोशी आने पर डॉक्टर से मिलने को कहता है।

ध्यान दें: सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, उलझन, ठंडी और चिपचिपी त्वचा या बहुत ज्यादा खून बहने पर तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

ब्लड प्रेशर कम क्यों होता है? जानें प्रमुख कारण

अब तक हमने समझा कि लो ब्लड प्रेशर क्या है। अगला सवाल यह है कि ब्लड प्रेशर कम क्यों होता है? NHS के मुताबिक इसकी कई वजहें हो सकती हैं। सबसे आम लो ब्लड प्रेशर के कारण ये हैं:

1. शरीर में पानी की कमी

कम पानी पीना, उल्टी-दस्त या गर्मी में ज्यादा पसीना आना, इन सब से शरीर का पानी घट जाता है। पानी घटता है, तो खून भी कम हो जाता है और बीपी गिर सकता है।

भारत की गर्मी में आमतौर पर ये खूब दिखता है। द वीक की एक रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बताया कि तेज गर्मी में पसीने से खून की मात्रा घटती है और चक्कर व कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है।

2. खून और पोषण की कमी

आयरन, विटामिन B12 या फोलेट की कमी होने पर एनीमिया यानी खून की कमी हो सकती है। तब थकान और चक्कर घेर लेते हैं। हालांकि कम बीपी वाले हर इंसान में पोषण की कमी ही वजह होती है, ऐसा भी नहीं है।

3. अचानक खड़े हो जाना

लेटे या बैठे हुए एकदम उठने पर कई लोगों को चक्कर आ जाता है। इसे पोस्टुरल या ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहते हैं। अगर आसान भाषा में कहें तो, खड़े होते ही शरीर बीपी को तुरंत संभाल नहीं पाता।

4. दवाएं और दूसरी बीमारियां

कुछ दवाएं बीपी गिरा देती हैं, जैसे बीपी की गोलियां या पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं। दिल की समस्या, थायरॉइड, हार्मोन की गड़बड़ी और गर्भावस्था भी असर डाल सकती हैं। इसलिए लो बीपी होने के कारण खोजते समय अपनी दवाओं की लिस्ट डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

5. अचानक गिरावट के कारण

कई बार बीपी धीरे-धीरे नहीं, एकदम से गिरता है। अचानक ब्लड प्रेशर कम होने के कारण अक्सर गंभीर होते हैं, जैसे बहुत ज्यादा खून बहना, तेज इन्फेक्शन, गंभीर एलर्जी या शरीर में पानी की अचानक कमी। ऐसे में सिर्फ पानी पीना और इंतजार करना की यह खुद से नार्मल हो जाएगा यह ठीक नहीं।

6. तनाव और बिगड़ी दिनचर्या

कम नींद, खाना छोड़ देना और घंटों खड़े रहना भी बीपी पर असर डाल सकते हैं। फिर भी तनाव को अकेली वजह न मानें। यह कई संभावित वजहों में से सिर्फ एक है।

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ब्लड प्रेशर कम होने पर क्या करें?

घर में किसी को अचानक चक्कर आ जाए, तो घबराने की बजाय, सही कदम अपनाना ज्यादा समझदारी वाला काम है। यहां देखिए ब्लड प्रेशर कम होने पर क्या करें:

1. उसे तुरंत किसी सुरक्षित जगह बैठा दें या लिटा दें, ताकि वह गिरे नहीं।

2. एकदम उठने या चलने न दें। ठीक लगे, तब भी पहले बैठाएं, फिर धीरे से खड़ा करें।

3. वह पूरे होश में है और आराम से निगल पा रहा है, तो पानी दें। बेहोश या बहुत सुस्त इंसान के मुंह में कुछ न डालें।

4. हो सके तो बीपी नापें और लिख लें कि दिक्कत कब शुरू हुई।

5. बार-बार ऐसा हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

एक बात याद रखें। हर बार नमक-चीनी का घोल पिलाना सही नहीं है। दिल या किडनी के मरीजों को इससे नुकसान हो सकता है। और बेहोशी, सीने में दर्द या सांस की तेज तकलीफ हो, तो घरेलू नुस्खे में टाइम न लगाएं, सीधे अस्पताल पहुंचें।

लो ब्लड प्रेशर में क्या खाना चाहिए?

कोई एक चीज खाने से बीपी ठीक नहीं हो जाता। पर सही खान-पान शरीर को संभाले रखता है। तो लो ब्लड प्रेशर में क्या खाना चाहिए, यह इन बातों से तय करें:

  • पानी और तरल चीजें: दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। गर्मी और बीमारी में जरूरत और बढ़ जाती है।
  • बैलेंस्ड डाइट: दाल, हरी सब्जी, फल और अनाज रोज खाएं। आयरन और B12 वाली चीजों पर खास ध्यान दें।
  • टाइम पर खाना: ज्यादा देर भूखे न रहें। कुछ लोगों को थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना सूट करता है।
  • नमक: कुछ मामलों में डॉक्टर नमक बढ़ाने को कहते हैं। पर दिल या किडनी की दिक्कत हो, तो खुद से बदलाव न करें।

जिन्हें डॉक्टर ने पानी कम पीने को कहा है, वे उतना ही पिएं जितना डॉक्टर ने बताया है।

लो ब्लड प्रेशर में सही खान-पान चुनना आपकी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। अपनी जरूरतों के अनुसार डाइट से जुड़ी सही सलाह पाने के लिए हमसे संपर्क करें।

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लो ब्लड प्रेशर से बचाव के लिए रोज की आदतें

हर बार लो बीपी रोका नहीं जा सकता, क्योंकि कभी वजह कोई दवा या बीमारी होती है। फिर भी छोटी आदतें बड़ा फर्क डालती हैं। लो ब्लड प्रेशर से बचाव की शुरुआत इन बातों से करें:

  • बिस्तर से उठते वक्त पहले कुछ पल बैठें, फिर खड़े हों।
  • पानी पीने की आदत बनाए रखें।
  • नाश्ता और बाकी खाना टाइम पर खाएं।
  • एक जगह ज्यादा देर खड़े न रहें।
  • हल्का योग और प्राणायाम के अभ्यास करें।
  • दवा की खुराक खुद से कम या बंद न करें। दवा लेने के बाद चक्कर आएं, तो डॉक्टर को बताएं।

लो ब्लड प्रेशर का इलाज: आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद

लो ब्लड प्रेशर का इलाज हर इंसान के लिए एक जैसा नहीं होता, क्योंकि वजह अलग-अलग होती है। जब वजह साफ नहीं मिलती, तो आज का इलाज अक्सर बीपी को ऊपर रखकर लक्षण काबू करने पर टिक जाता है। आयुर्वेद इसी जगह अलग रास्ता लेता है और पूरे शरीर को देखता है। दोनों तरीके समझ लें, फिर अपने डॉक्टर के साथ तय करें।

आधुनिक चिकित्सा क्या करती है?

डॉक्टर सबसे पहले आपकी दवाएं देखते हैं और पानी की कमी जैसी वजहें जांचते हैं। NICE के अनुसार इनसे बात न बने, तो फ्लूड्रोकॉर्टिसोन या मिडोड्रिन जैसी बीपी बढ़ाने वाली गोलियां दी जा सकती हैं।

ये गोलियां बीपी ऊपर ले आती हैं, पर बीपी गिरने की वजह नहीं बदलतीं। इनके साइड इफेक्ट भी हैं। NICE बताता है कि मिडोड्रिन से लेटने पर बीपी बहुत बढ़ सकता है, इसलिए लेटकर और खड़े होकर, दोनों में बीपी की नियमित जांच जरूरी है। एक ट्रायल में दवा लेने वाले 74 में से 5 मरीजों (6.8%) को दवा छोड़नी पड़ी, जबकि नकली गोली वाले 104 में से 3 (2.9%) को। ज्यादातर वजह यही बढ़ा हुआ बीपी था।

फ्लूड्रोकॉर्टिसोन में शरीर में नमक और पानी रुक सकता है और पोटैशियम घट सकता है। एक मेडिकल रिव्यू में बताया गया है कि पोटैशियम की कमी औसतन करीब 8 महीने में दिखी।

ये दवाएं हर किसी को नहीं दी जातीं, और कई लोगों के लिए जरूरी भी होती हैं। इसलिए इन्हें खुद से शुरू या बंद न करें।

आयुर्वेद क्या करता है?

आयुर्वेद सिर्फ बीपी की रीडिंग नहीं देखता। वह पूरे शरीर को देखता है, यानी आपका आहार (खान-पान), विहार (रहन-सहन और दिनचर्या) और आपकी प्रकृति।

इसके बाद बीमारी पर दो तरह से काम होता है:

  • शमन: लक्षणों को शांत करने वाले उपाय, जैसे खान-पान में बदलाव और जड़ी-बूटी।
  • शोधन: शरीर की सफाई वाली प्रक्रियाएं, जिन्हें पंचकर्म कहते हैं।

ये तरीके चिकित्सक की देखरेख में और आपकी हालत देखकर ही चुने जाते हैं।

Jeena Sikho HiiMS इस समस्या को कैसे देखता है?

Jeena Sikho HiiMS में लो बीपी को सिर्फ एक रीडिंग की तरह नहीं देखा जाता। वहां आपकी पूरी हालत देखी जाती है, यानी लक्षण, खान-पान, नींद, दिनचर्या और चल रही दवाएं।

1. आहार और रहन-सहन पर काम

सबसे पहले खाने के समय, पानी पीने की आदत और रोज के कामों पर बात होती है। क्योंकि कई बार बीपी गिरने की वजह यहीं छिपी होती है।

2. थेरेपी

हर इंसान की हालत और प्रकृति को देखकर चिकित्सक थेरेपी चुनते हैं। जैसे:

लो बीपी के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी

  • अभ्यंग: अभ्यंग में औषधीय तेल से पूरे शरीर की हल्के हाथ से मालिश की जाती है। आयुर्वेद में इसे दिनचर्या का हिस्सा माना गया है। मकसद शरीर को आराम देना और थकान कम करना है।
  • शिरोधारा: इसमें माथे पर एक तय धार में गुनगुना औषधीय तेल या तरल डाला जाता है। यह धार लगातार और धीमी रहती है। इसका मकसद मन को शांत करना और तनाव कम करना है।
  • लोअर लेग कंट्रास्ट थेरेपी: इसमें पैरों को बारी-बारी से गर्म और ठंडे पानी की बाल्टी में रखा जाता है। यह पिंडलियों तक के हिस्से पर की जाती है। इसका मकसद पैरों के आराम और रक्त संचार की देखभाल है।

3. दाहिनी नाक से सांस लेने का अभ्यास

इसमें बायीं नाक बंद करके सिर्फ दाहिनी नाक से सांस ली जाती है। योग में दाहिनी नाक को सूर्य नाड़ी से जोड़ा जाता है। यह सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है। यह शरीर का वह हिस्सा है, जो हमें चौकन्ना और सक्रिय रखता है। इसलिए इससे शरीर और मन की ऊर्जा बढ़ने और बीपी संतुलित होने में मदद मिलने की बात कही जाती है।

4. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

कुछ जड़ी-बूटियां, जैसे अश्वगंधा, तुलसी और अदरक, पारंपरिक रूप से रोज की सेहत और ताकत के लिए इस्तेमाल होती हैं। हर जड़ी-बूटी हर इंसान के लिए ठीक नहीं होती। इसलिए इन्हें खुद से शुरू न करें।

5. डॉक्टर की निगरानी

आपकी जो दवा चल रही है, उसकी जानकारी चिकित्सक को देना जरूरी है। इससे आयुर्वेदिक देखभाल और आधुनिक इलाज के बीच तालमेल बना रहता है।

रोज की देखभाल के लिए: Jeena Sikho BP Care Combo

लो बीपी में सबसे पहले जांच और डॉक्टर की सलाह आती है। उसके साथ रोज की सेहत की दिनचर्या बनाने में यह कॉम्बो भी देखा जा सकता है।

यह कॉम्बो छह आयुर्वेदिक प्रोडक्ट एक साथ लाता है। इसका ध्यान पाचन, शरीर की सफाई, दिल और रक्त संचार की देखभाल और रोज की ऊर्जा पर है।

इसमें क्या-क्या है:

  • Gut Care Juice: आंवला, बहेड़ा, हरड़, बिल्व और पपीता जैसी चीजों वाला जूस, जो पाचन की देखभाल के लिए है।
  • Pet Yakrit Pleeha Shuddhi Kit: पेट की सफाई के लिए ग्रेन्यूल्स और शॉट्स का किट।
  • Mix Berry Herbal Blend Juice: सेब, आम, अनानास, सी-बकथॉर्न और आंवला वाले फलों का जूस।
  • Pure Shilajit: हर कैप्सूल में 500 mg शिलाजीत एक्सट्रैक्ट, जिसे आयुर्वेद में ऊर्जा और स्टैमिना के लिए जाना जाता है।
  • Dr. BP Care: अर्जुन, सर्पगंधा, शंखपुष्पी और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों वाली गोली।
  • Maha Rakt Chaap Vati: अर्जुन, गुडूची और पुष्करमूल जैसी पारंपरिक चीजों वाली गोली।

Jeena Sikho BP Care Combo

हर प्रोडक्ट की अपनी खुराक और समय है, इसलिए सबको एक साथ न लें। लेबल पर लिखी या डॉक्टर की बताई विधि मानें।

जरूरी सावधानी: Dr. BP Care और Maha Rakt Chaap Vati दिल और बीपी की सेहत को ध्यान में रखकर बने हैं। अगर आपका बीपी पहले से कम रहता है, तो इन्हें लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। यह कॉम्बो लो बीपी का इलाज नहीं है और डॉक्टर की दवा की जगह नहीं लेता। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, कोई दवा लेने वाले और किसी बीमारी से जूझ रहे लोग शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

अब आप समझ गए होंगे कि लो ब्लड प्रेशर क्या है, इसके लक्षण कैसे दिखते हैं और कारण कहां छिपे हो सकते हैं। हर कम रीडिंग डरने की बात नहीं होती। पर चक्कर, कमजोरी या बेहोशी बार-बार हो, तो उसे टालना ठीक नहीं। पानी, सही खाना जैसी छोटी आदतें काफी मदद करती हैं। 

आयुर्वेदिक देखभाल शुरू करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर से जरूर पूछ लें। दिक्कत लंबे समय से है, तो आप Jeena Sikho HiiMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों से VOPD के जरिए ऑनलाइन परामर्श भी ले सकते हैं।

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FAQs

1. लो ब्लड प्रेशर क्या है और इसे कब कम माना जाता है?

जब नसों में खून का दबाव सामान्य से नीचे चला जाए, तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। आम तौर पर 90/60 mmHg से कम रीडिंग को कम माना जाता है, पर लक्षण भी देखे और बाकी फैक्टर्स भी देखे जाते हैं।

2. लो ब्लड प्रेशर के लक्षण क्या हैं?

चक्कर, कमजोरी, धुंधला दिखना, जी मिचलाना और बेहोशी इसके मुख्य लक्षण हैं। ये बार-बार दिखें, तो डॉक्टर से जांच करा लेना ठीक रहता है।

3. अचानक ब्लड प्रेशर कम होने पर क्या करना चाहिए?

इंसान को सुरक्षित जगह पर बैठाएं या लिटाएं और होश में हो, तो उसे पीने के लिए पानी दें। बेहोशी, सीने में दर्द या सांस की तेज तकलीफ हो, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।

4. लो ब्लड प्रेशर में क्या खाना चाहिए?

बैलेंस्ड डाइट, सही मात्रा में पानी और टाइम पर खाना मदद करता है। नमक या सप्लीमेंट बढ़ाने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

5. क्या आयुर्वेद से लो ब्लड प्रेशर का इलाज संभव है?

आयुर्वेद सिर्फ लक्षण नहीं, आपकी पूरी दिनचर्या और प्रकृति को समझकर चलता है। इसलिए देखभाल हर इंसान के लिए अलग होती है। जांच कराकर योग्य चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सही रहता है।

Priyanka Biswas
Author:  Priyanka Biswas
With 7 years of experience in Ayurvedic practice, Dr. Priyanka Biswas works with patients concerned about blood pressure and related health issues. As part of Jeena Sikho HiiMS, she contributes to patient care through practical Ayurvedic and lifestyle guidance. She takes a practical approach to care, helping patients understand how everyday habits, food choices and lifestyle can play a role in maintaining healthier blood pressure.

Disclaimer: The information provided on this blog is for general educational and informational purposes only. It is not intended to replace professional medical advice, diagnosis, or treatment. Always consult a qualified healthcare professional before making any changes to your diet, lifestyle, or treatment plan. Individual results may vary.

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